Tulsi Plant Infmormation : तुलसी- एक पूजनीय पौधा

भारत में तुलसी (Tulsi Plant Infmormation) को पूजनीय माना गया है। तुलसी (Tulsi) के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत वर्ष में हर घर के आंगन में तुलसी (Basil Leaves) के पौधे होने की परिकल्पना की गई है। तुलसी का महत्व सिर्फ कपोल-कल्पित कर्मकांड एवं पूजी पद्धति तक नहीं है बल्कि इसका विशेष औषधीय उपयोग है जो इस पौधे को भारत में औषधीय पौधों में विशेष स्थान प्रदान करता है। आयुर्वेद में तो तुलसी के औषधीय गुणों विशेष स्थान दिया गया है। तुलसी (Tulsi) का उपयोग बिना किसी भय या साइड इफेक्ट के सर्दी-जुकाम, खांसी, दंत रोग और श्वास रोगों में अहम है।

हर घर में मिलेगा तुलसी (Tulsi- Basil) का पौधा

भारत के घर-गांव ऐसे कम ही होंगे जहां तुलसी (Tulsi) का पौधा न हो। पारंपरिक एवं मांगलिक कार्यों में तुलसी के उपयोग के अलावा इसका औषधीय इस्तेमाल इसे बहुत खास बनाता है। यही कारण है कि पूजा-पाठ, शादी समारोह, कर्मकांड से लेकर किी भी बीमारी के इलाज में तुलसी (Tulsi) का विशेष महत्व है।

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छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को जिन्हें दवाओं के साइड इफेक्ट होने का खतरा हो, उन्हें सर्दी-खांसी या जुकाम आदि होने पर तुलसी (Basil Leaves) के पत्तों का काढ़ा बनाकर पिलाना हर घर में आम है।

तुलसी में मौजूद पोषक

तुलसी (Basil Leaves) में ट्रैनिन, सैवोनिन, ग्लाइकोसाइड और एल्केलाइड्स आदि प्रमुख्य रसायन हैं। तुलसी (Tulsi) का प्रमुख सक्रिय तत्व पीला उडऩशील तेल है। इसकी मात्रा संगठन, स्थान और समय के अनुसार विभिन्न है। तुलसी में 0.1 से 0.3 प्रतिशत तक तेल मिलना सामान्य बात है। तेल के अलावा तुलसी के पत्तों में लगभग 83 मिलीग्राम प्रतिशत विटामिन सी और 2.5 मिलीग्राम प्रतिशत कैरीटीन होता है। तुलसी (Basil Leaves) के मुख्य घटक हैं सीटोस्टेरॉल, पामिटिक, स्टीयरिक, ओलिक, लिनोलक और लिनोलिक एसिड।

तुलसी के खास फायदे – Tulsi ke fayde – Benefits of Basil Leaves in Hindi

  • त्वचा में कोई संक्रमण होने पर तुलसी (Tulsi) के पत्तों को त्वचा पर रगडऩे से मर्ज से आराम मिलेगा।
  • किडनी की पथरी होने पर तुलसी की पत्तियों को उबालकर बना काढ़ा शहद के साथ नियमित छह महीने तक पीने से पथरी मूत्र मार्ग से बाहर निकल आती है।
  • शिवलिंगी के बीजों को तुलसी और गुड़ के साथ पीसकर निसंतान महिला को खिलाने पर उसको जल्द संतान सुख मिलने के भी दावे किए जाते हैं।
  • खून में कोलेस्ट्राल को नियंत्रित करने के अपने गुण के कारण तुलसी दिल की बीमारी में वरदान साबित होती है। हृदयघात से पीडि़त लोगों को तुलसी (Tulsi Plant Infmormation) के रस का सेवन नियमित करना चाहिए।
  • तुलसी (Basil Leaves) की पत्तियों का रस निकाल कर इसमें बराबर मात्रा में नींबू का रस मिलाए और रात को चेहरे पर लगाने से झाइयां नहीं रहती और चेहरे की रंगत खिल जाती है।
  • फ्लू रोग होने पर तुलसी (Tulsi) के पत्तों का काढ़ा, सेंधा नमक मिलाकर पीने से ठीक होता जाता है।
  • माइग्रेन के तेज दर्द से निजात हासिल करने में मददगार है। रोजाना 4-5 बार तुलसी की 6-7 पत्तियां चबाने से कुछ ही दिनों में माइग्रेन की समस्या में आराम मिलता है। वहीं, अत्यधिक थकान होने पर भी तुलसी (Tulsi) की पत्तियों का सेवन थकान दूर भगाता है।

आयुर्वेद में तुलसी (Basil Leaves) है रामबाण

आयुर्वेद मेें तुलसी (Basil Leaves) को हर तरह की बीमारी के निदान के लिए रामबाण औषधि माना गया है। शायद यही कारण है कि तुलसी को जड़ी-बूटियों की रानी और जीवन का अमृत कहा गया है।

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